
एम्स बिलासपुर के ईएनटी विभाग को अब विश्वस्तरीय सर्जिकल सिस्टम से लैस किया जा रहा है। संस्थान में जल्द ही एडवांस फेसेट सेट स्थापित होगा। यह अत्याधुनिक सिस्टम न केवल सर्जरी को सटीक बनाएगा, बल्कि उन मरीजों के लिए राहत भरा साबित होगा जिन्हें अब तक जटिल ऑपरेशनों के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती थी। यह सिस्टम अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक यूनिट है, जिसमें हाई-डेफिनिशन कैमरा, पावरफुल लाइट सोर्स और सूक्ष्म सर्जिकल उपकरणों का पूरा सेट होता है।
इसके जरिये सर्जन बिना किसी बाहरी चीरे के, नाक के प्राकृतिक रास्तों से होते हुए साइनस के सबसे गहरे और संवेदनशील हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। मस्तिष्क और आंखों के पास होने वाली सर्जरी में यह सिस्टम नेविगेटर की तरह काम करता है, जिससे जोखिम न के बराबर रह जाता है। एचडी विजुअल्स के कारण सर्जन नाक के भीतर की बारीक नसों और हड्डियों को स्पष्ट देख पाएंगे, जिससे गलती की गुंजाइश खत्म होगी। इस तकनीक में नाक के बाहर कोई चीर-फाड़ नहीं होती, जिससे चेहरे पर कोई निशान नहीं आता। कम रक्तस्राव और न्यूनतम दर्द के कारण मरीज को 24 से 48 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी मिल सकेगी।
नेजल पॉलिप्स, गंभीर साइनोसाइटिस और स्कल-बेस (दिमाग की निचली सतह) के ट्यूमर का इलाज अब बिलासपुर में ही संभव होगा। इस अत्याधुनिक सिस्टम की बारीकियों और तकनीकी मानकों को परखने के लिए 11 अप्रैल को एम्स बिलासपुर के ईएनटी विभाग में एक महत्वपूर्ण प्री-बिड बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें विशेषज्ञ डॉक्टर और तकनीकी टीम मशीन की क्षमता पर मंथन करेंगे। मेक इन इंडिया नीति के तहत उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी उपकरणों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। एम्स बिलासपुर में हर महीने नाक और साइनस की समस्याओं वाले सैकड़ों मरीज पहुंच रहे हैं। इस एडवांस फेसेट सिस्टम के लगने से वेटिंग लिस्ट कम होगी और एक ही छत के नीचे जांच से लेकर सफल ऑपरेशन तक की विश्वस्तरीय सुविधा मिलेगी।
