
प्रदेश में इस बार पंचायतीराज के चुनाव के लिए 30 चुनाव चिह्न निर्धारित किए गए हैं। इनके आधार पर प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे। किसी भी उम्मीदवार को अपनी पसंद का चुनाव चिह्न चुनने की सुविधा नहीं होगी। सभी चिह्न निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीरियल वाइज आवंटित किए जाएंगे। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की अंतिम तिथि पूरी होने के बाद ही चुनाव चिह्नों का आवंटन किया जाएगा। यह जिम्मेदारी संबंधित सहायक निर्वाचन अधिकारी की होगी। वे नियमों के अनुसार प्रत्याशियों को चिह्न बांटेंगे। प्रशासन का मानना है कि सीरियल वाइज आवंटन से चुनाव प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी।
उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न मिलने के बाद ही ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत राजनीति तेज हो जाएगी। फिलहाल एक पंचायत में 8 से 10 लोग प्रधान और उपप्रधान पद के लिए दावेदारी जता रहे हैं। कई स्थानों पर सहमति बनाने के प्रयास भी चल रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता बढ़ गई है। खासकर युवा वर्ग पंचायत प्रधान, पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव में बढ़-चढ़कर दावेदारी पेश कर रहा है। इससे चुनावी माहौल पहले से ही गर्म होने लगा है।
पंचायतीराज चुनाव को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटन और एजेंटों की नियुक्ति से जुड़े नियम स्पष्ट कर दिए हैं। नामांकन पत्रों के आधार पर तैयार प्रत्याशियों की सूची हिंदी (देवनागरी लिपि) में वर्णानुक्रम से प्रकाशित की जाएगी। इसमें उम्मीदवारों के नाम और पते शामिल होंगे।
एजेंट नियुक्ति के लिए प्रक्रिया तय
नियम 43 के अनुसार, कोई भी प्रत्याशी चुनाव एजेंट नियुक्त कर सकता है। इसके लिए फार्म-25 में नामांकन के समय या चुनाव से पहले किसी भी समय नियुक्ति की जा सकती है। नियम 44 के तहत प्रत्याशी या उसका चुनाव एजेंट प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए एक पोलिंग एजेंट नियुक्त कर सकता है, बशर्ते वह अधिनियम के तहत अयोग्य न हो। यह नियुक्ति फार्म-26 में लिखित रूप में दो प्रतियों में की जाएगी।
नियम 45 के अनुसार प्रत्याशी या उसका चुनाव एजेंट मतगणना के लिए काउंटिंग एजेंट नियुक्त कर सकता है। इसके लिए फार्म-27 का उपयोग किया जाएगा। काउंटिंग एजेंट को मतगणना के दिन अधिकृत अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
