
अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026 का आयोजन राजधानी लखनऊ में जारी है। इस वैचारिक कार्यक्रम में चर्चित फिल्मी सितारे वरुण धवन और मृणाल ठाकुर ने भी शिरकत की। दोनों कलाकार इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में हैं। संवाद के मंच पर दोनों सितारे अपनी राय रख रहे हैं। पढ़िए इन्होंने क्या कहा?वरुण, जो फिल्मी घरानों से आते हैं उन पर नेपोटिज्म का टैग लगता है। जो बाहर से आते हैं, उनके संघर्ष की बहुत कहानी होती है। आपके लिए अपना रास्ता बनाना कैसा रहा?
वरुण: हमें जीवन परमात्मा की वजह से मिलता है। जीवन परमात्मा की देन है। मेरे हिसाब से हर इंसान को अपना टेस्ट देना पड़ता है। वो किसी भी तरीके से। मेरा टेस्ट यही था कि दर्शकों को जीतना था। मैंने काफी फिल्में पिता जी के निर्देशन के बिना बाहर भी की हैं। पिछली फिल्म बॉर्डर 2 काफी चली थी। बहुत प्यार मिला उसे। हर शुक्रवार एक नया टेस्ट होता है। अब जब भी कोई नेपोटिज्म का आरोप लगlता है तो मुझे लगता है कि वह एक आवाज है। अभी मेरा काम करेगा सब।
मृणाल, आपकी यात्रा अलग रही। पहले मराठी सिनेमा, फिर टीवी और फिर सुपर 30… यह सब कैसा रहा?
मृणाल: मैं लखनऊ में हूं। यहां मेरा मुस्कुराना नहीं रुक रहा। मैं जब तक लखनऊ न आऊं, कोई फिल्म पूरी नहीं होती। मैं सभी दर्शकों का शुक्रिया अदा करूंगी। मुझे दर्शकों ने जो प्यार दिया है, वही मेरे लिए एक आग का काम करता है। मैं सभी से यही कहना चाहूंगी कि आपके सपने कभी छोटे नहीं होते। आपका सपना एक दिन वरुण धवन के साथ काम करने का जरूर पूरा होगा, जैसे मेरा पूरा हुआ। मैं अपनी यात्रा में सपोर्ट करने वाले सभी लोगों का शुक्रिया कहूंगी। मैं बहुत जल्दी बुरा मान जाती थी। उसके बावजूद सबका साथ मिला। वरुण ने जैसा कहा कि हर फ्राइडे टेस्ट होता है। मुझे भी कोई जब अचानक मिलकर कहता है कि आपका काम बहुत अच्छा लगा। आपकी वजह से मैंने अपना ख्वाब पूरा किया। तो वह बड़ी बात होती है।
वरुण कभी लगा कि कुछ और करना चाहिए?
वरुण: जब मैं छोटा था तो लगता था कि मेरा एक टीवी चैनल होना चाहिए। मैं पत्रकार बनूं या एंकर रहूं पर मेरा टीवी शो होना चाहिए। इसके अलावा बचपन में लगता था कि अखबार के पहले पेज पर मेरा नाम आए। इस पर मेरा भाई मजाक बनाता था कि तू चोरी करेगा तो तेरा नाम जरूर आएगा। फिर, जब 14 साल का हुआ तो मुझे लगता था कि रेसलर बन जाऊं। मैंने WWE देखकर भी बहुत कुछ सीखा है।
