
अपराधियों के पुनर्वास और सुधार की दिशा में हिमाचल प्रदेश कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग ने नई पहल अक्षर से आत्मबोध शुरू की है। इसका उद्देश्य कैदियों में पढ़ने की आदत विकसित करना, सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना और आत्ममंथन के जरिये उनके व्यक्तित्व में बदलाव लाना है। पहल की शुरुआत मॉडल सेंट्रल जेल कंडा में कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग के महानिदेशक अभिषेक त्रिवेदी की ओर से की गई है। विभाग जल्द ही इस अभियान को प्रदेश की अन्य जेलों तक विस्तारित करने की तैयारी में है।
हिमाचल कारागार एवं सुधार सेवाएं विभाग की ओर से गुरुवार को जिला कारागार सोलन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें कैदियों को किताबें दी गईं। पुस्तक पढ़ने के बाद बंदियों को उससे मिली सीख और अपने विचारों का लिखित सार प्रस्तुत करना होगा। जिनके व्यवहार और सोच में सकारात्मक बदलाव दिखाई देगा, उन्हें नियमों के तहत सजा में राहत पर भी विचार किया जाएगा। महानिदेशक कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं अभिषेक त्रिवेदी ने बताया यह पहल जेलों को वास्तविक अर्थों में सुधार गृह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। विभाग का लक्ष्य है कि सजा पूरी कर समाज में लौटने वाले बंदी एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक के रूप में नई शुरुआत कर सकें।
