
हिमाचल प्रदेश में तंबाकू वाले नशे का सेवन करने वाले पुरुषों की संख्या में कमी आई है लेकिन महिलाओं में यह संख्या बढ़ी है। यह खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 में हुआ है। इसके साथ ही शहरों की बजाय ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं इसकी ज्यादा आदी हैं। हिमाचल प्रदेश में यह सर्वे केंद्र सरकार ने पापुलेशन रिसर्च सेंटर और इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ एजेंसी से 23 जून 2023 से 20 जनवरी 2024 तक करवाया था। इसमें कुल 10,437 परिवार शामिल रहे और 10,271 महिलाओं और 1,469 पुरुषों पर सर्वे किया गया।
केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में जारी सर्वे के अनुसार, 15 साल व अधिक आयु की तंबाकू पदार्थ का इस्तेमाल करने वाली महिलाएं 1.9 फीसदी हैं, जबकि 2019-21 के सर्वे में यह आंकड़ा मात्र 1.7 फीसदी था। इस बार शहरी क्षेत्रों में यह 1.0 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.0 फीसदी है। इसके साथ ही 15 वर्ष व इससे अधिक आयु के पुरुषों में तंबाकू वाले नशे का इस्तेमाल करने वाले 2023-24 में 28.9 फीसदी रह गए हैं, जो कि 2019-21 में 32.2 फीसदी थे। पुरुषों में तंबाकू के सेवन की दर 3.3 फीसदी घटी है। शहरी पुरुषों में यह आंकड़ा 24.6 फीसदी और ग्रामीण में 29.5 फीसदी है।
तंबाकू के साथ शराब के नशे से भी दूर हो रहे
सर्वे के अनुसार, अल्कोहल (शराब) का सेवन करने में 15 वर्ष व इससे अधिक आयु की महिलाओं के आंकड़े में कोई इजाफा नहीं हुआ है। पुरुषों में यह आंकड़ा घटा है। साल 2019-21 के बीच अल्कोहल का नशा करने वाले पुरुष 31.9 फीसदी थे, जो इस सर्वे के अनुसार 1.7 फीसदी घटकर 30.2 फीसदी रह गए हैं। शहरी क्षेत्रों में 27.6 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 30.6 फीसदी पुरुष इसका सेवन करते हैं। युवाओं और वयस्कों में पारंपरिक तंबाकू या धूम्रपान करने की दर में कमी आई है। लोग तंबाकू उत्पादों से दूरी बना रहे हैं, जो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में सुखद परिणाम है। प्रदेश को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान का यह सकारात्मक असर है। –प्रदीप ठाकुर, मिशन डायरेक्टर, नेशनल हेल्थ मिशन
व्यापक जागरूकता अभियान जरूरी : राज्यपाल
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने प्रदेशवासियों विशेषकर युवाओं से तंबाकू और निकोटीन उत्पादों से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भागीदारी की अपील की। राज्यपाल ने तंबाकू की लत के विरुद्ध जन-जागरूकता को जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि तंबाकू उत्पादों का दिखावटी आकर्षण स्वास्थ्य, परिवार और समाज के लिए हानिकारक है। उन्होंने बताया कि तंबाकू सेवन कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है। इसका दुष्प्रभाव युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। कविंद्र गुप्ता ने कहा कि तंबाकू उत्पादों का आकर्षण भ्रामक है। यह व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार की खुशहाली और समाज की प्रगति के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने युवाओं को इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की बात कही। उन्हें सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करना होगा। राज्यपाल ने स्वस्थ जीवनशैली, खेलकूद, योग और रचनात्मक गतिविधियों को अपनाने पर बल दिया। राज्यपाल ने कहा कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर तंबाकू और निकोटीन की लत के विरुद्ध व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।
नियम ताक पर, स्कूलों के पास धड़ल्ले से बिक रहे तंबाकू उत्पाद
हिमाचल प्रदेश में सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री की जा रही है जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। यह खुलासा स्वास्थ्य सचिव की ओर से जारी सर्वेक्षण रिपोर्ट में हुआ है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने शनिवार को शिमला में ‘तंबाकू मुक्त हिमाचल प्रदेश नीति, प्रवर्तन और तंबाकू मुक्त पीढ़ी’ विषय पर राज्य स्तरीय प्रसार कार्यशाला का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य सचिव एम सुधा देवी ने की। इस दौरान प्रदेश में तंबाकू विक्रेताओं की संख्या और तंबाकू नियंत्रण कानूनों के अनुपालन पर आधारित सर्वेक्षण रिपोर्ट भी जारी की गई। इसमें िचंताजनक आंकड़े सामंने आए।
सर्वेक्षण रिपोर्ट में कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 10 प्रतिशत से अधिक तंबाकू विक्रेता शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में संचालित पाए गए, जो कानून का सीधा उल्लंघन है। इसके अलावा अधिकांश दुकानों पर नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद न बेचने संबंधी अनिवार्य चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाए गए थे। कई स्थानों पर तंबाकू उत्पाद खुले तौर पर प्रदर्शित किए जा रहे थे, जिससे बच्चों और किशोरों की इन तक पहुंच आसान हो रही है।
स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी ने कहा कि बच्चों और युवाओं को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा)-2003 को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में हुक्का बारों को नियंत्रित करने के लिए भी कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने की सिफारिश की जाएगी।
इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डॉ. गोपाल बेरी, दंत स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डॉ. सतीश चौधरी, वाइटल स्ट्रेटेजीज नई दिल्ली के तंबाकू नियंत्रण निदेशक डॉ. राणा जे सिंह, अतिरिक्त आयुक्त आबकारी एवं कराधान रविंदर कुमार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उप मिशन निदेशक डॉ. राजेश गुलेरी और पंचायती राज विभाग के उप निदेशक विजय ब्रागटा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में 55 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
