हिमाचल: प्रतिनियुक्ति में अनियमितता पर हाईकोर्ट सख्त, नहीं मिलेगा ये लाभ, कर्मचारी की सर्विस बुक में दर्ज होगा

Spread the love

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की तैनाती और प्रतिनियुक्ति व्यवस्था में अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कर्मचारी जनजातीय या दुर्गम क्षेत्रों के पदों के नाम पर वेतन लेकर सुगम स्टेशनों पर काम करते हुए भविष्य में हार्ड एरिया का अनुचित लाभ नहीं ले सकेगा।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को मुख्य सचिव के 5 जनवरी के निर्देश में संशोधन करने का आदेश दिया है। सरकार को छह सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी कर्मचारी को उसकी मूल तैनाती स्थल से हटाकर किसी अन्य स्थान पर तैनात किया जाता है या प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है, तो उसकी अवधि, स्थान और विवरण सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक) में अनिवार्य रूप से दर्ज किए जाएं। डेपुटेशन पर बिताए गए समय को भविष्य में ट्रांसफर और पोस्टिंग संबंधी लाभों के लिए अलग से गिना जाएगा।

कई कर्मचारी कागजों में ही दुर्गम क्षेत्रों में तैनात, काम कर रहे मुख्यालयों में

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि कई कर्मचारी कागजों में जनजातीय, ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात दिखाए जाते हैं, जबकि वास्तव में वे मुख्यालयों, सचिवालय या अन्य सुगम स्टेशनों पर कार्यरत हैं। इससे दुर्गम क्षेत्रों में सरकारी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। सुनवाई के दौरान सामने आया कि शिक्षा विभाग के 86 और स्वास्थ्य विभाग के 123 कर्मचारी अपनी मूल तैनाती के स्थान पर कार्य नहीं कर रहे थे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से 1999 के सरकारी निर्देशों का हवाला देते हुए डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया गया। सरकार ने आश्वस्त किया कि संशोधित निर्देशों में इन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रूप से तय की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *