
प्रदेश में नशा आज बड़ी समस्या बन गया है। हालात यह हैं कि ऊपरी शिमला के केवल रोहड़ू और जुब्बल दो उपमंडल में चिट्टे के दलदल में फंसे करीब दो सौ युवक जेल की हवा खा चुके हैं। पांच युवकों की नशे के ओवरडोज से मौत हो चुकी है। हाल यह है कि दुर्गम क्षेत्र डोडरा क्वार तक चिट्टा पांव पसार चुका है।
वहीं, जिला परिषद उपाध्यक्ष सुरेंद्र रेटका, कृषक सलाहकार समिति के अध्यक्ष सोहन लाल चौहान व अन्य लोगों का कहना है कि पंचायत स्तर से चिट्टे को रोकने की समय पर पहल नहीं हुई और युवाओं की रगों में सफेद जहर घुलता रहा, तो उड़ता पंजाब की तर्ज पर हिमाचल को उड़ता हिमाचल बनने में अधिक समय नहीं बचा है। नशे को जड़ से खत्म करने के लिए पंचायत स्तर पर सरकार को पहल करनी होगी, ताकि युवाओं को चिट्टे की लत से बचाया जा सके। साल 2023 से 31 जनवरी, 2024 तक रोहड़ू, जुब्बल और चिड़गांव पुलिस थाने में चिट्टे के 90 मामले दर्ज किए गए। बीते दो साल में चिट्टे के मामले में करीब 123 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। इन लोगों से करीब सात सौ ग्राम चिट्टा पुलिस ने बरामद किया था।
इसके अलावा चिट्टा तस्करी मामले में अंतरर्राज्यीय शाही महात्मा गिरोह के करीब सरगना समेत 62 गुर्गे गिरफ्तार किए जा चुके हैं। संदीप शाह के गिरोह के कई लोग पुलिस टीम ने अलग-अलग जगह से गिरफ्तार किए हैं। रोहड़ू, जुब्बल, चिड़गांव कोटखाई क्षेत्र के करीब दो सौ लोगों के खिलाफ चिट्टे के मामले दर्ज हैं। बीते चार साल में इस क्षेत्र के पांच युवाओं की ओवरडोज से जान तक जा चुकी है।
2018 में पहली बार हुई थी चिट्टे से मौत
चिट्टे के नशे के कारण पहली बार मौत मार्च 2018 में एक युवती की कार के अंदर शिमला में हुई थी। युवती का शव उसके साथियों ने भेखलटी के पास झाड़ियों में फेंक दिया था। साल 2024 को हाटकोटी के पास भटवाड़ी के एक युवक का शव पुलिस ने पुल के पास से बरामद किया था। पिछले साल अक्तूबर में रोहड़ू में ही एक युवक का शव घर के पास खेत में मिला था। उसके जेब से सीरिंज बरामद की गई थी। दो मामले चिड़गांव में नशे के ओवरडोज से मौत के सामने आ चुके हैं। जांच के बाद पुलिस ने तीन मामलों में उनके साथियों के खिलाफ पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के मामले दर्ज किए हैं।
मौत का आंकड़ा अधिक, परिजनों को लोकलाज का भी डर
चिट्टे से मौत का आंकड़ा इससे कहीं अधिक है, लेकिन परिजन बदनामी के डर से शिकायत दर्ज नहीं करवाते हैं। सैकड़ों युवाओं का प्रदेश व प्रदेश के बाहर नशा मुक्ति केंद्र में उपचार चल रहा है। लोग लोकलाज के कारण इसका सार्वजनिक तौर पर खुलासा नहीं करते। ऐसे में पुलिस व समाज के लिए चिट्टे को रोकना चुनौती बन चुका है।
कोई भी व्यक्ति चिट्टा समेत किसी भी नशे की अधिक मात्रा में डोज लेता है, तो इससे उसको तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। जब कोई व्यक्ति पहली बार चिट्टे जैसा नशा अधिक मात्रा में ले, तो व्यक्ति की मौत हो सकती है। नशे के शिकार युवाओं के परिजन नियमित रूप से डॉक्टर से जांच करवाएं। चिट्टे का नशा इंजेक्शन के जरिये लेने से मौत का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लोग मिलकर प्रयास करें, तभी युवा इस दलदल से बाहर निकल सकते हैं- डॉ. रविंद्र शर्मा, एमएस सिविल अस्पताल रोहड़ू
पुलिस लगातार नशे को रोकने के प्रयास कर रही है। पुलिस के साथ नशे की रोकथाम के लिए आम लोगों की सहभागिता जरूरी है। नशे से दूर रहने के लिए युवाओं को खेलों में व्यस्त रखें। जांच में सामने आया कि अधिकांश बेरोजगार युवाओं का नशे की ओर अधिक रूझान हो रहा है। अभिभावक बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलों और बाग-बगीचों में व्यस्त रखें। आसपास यदि कोई नशे का कारोबार कर रहा, तो पुलिस को तुरंत इसकी सूचना दें-