पत्नी के खाते से निकाली नकदी, फिर खरीदा चिट्टा, 2023 के मामले की जांच में खुलासा

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में चिट्टा तस्करी के आरोप में जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी ने पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा किया है। चिट्टा खरीदने के लिए युवक ने पहले अपनी पत्नी के खाते से 4 हजार रुपये निकाले और बाद में पंचकूला में एक कपड़ा व्यापारी को 28 हजार रुपये देकर 13.64 ग्राम चिट्टा खरीदा। उसके बाद घूमने के लिए शिमला पहुंच गए। राजधानी शिमला के छोटा शिमला थाना में साल 2023 में पंजीकृत मामले में यह खुलासा हुआ है। 13 जुलाई को पुलिस की एक टीम ने मैहली क्षेत्र में एक कार में सवार चालक कुलदीप ठाकुर, सौरव चौहान और गौरव चौहान के कब्जे से 13.63 ग्राम चिट्टा बरामद किया था।

पुलिस जांच के दौरान हुआ ये बड़ा खुलासा
पुलिस जांच के दौरान आरोपियों ने शमी के नाम का खुलासा किया था। आरोपियों ने पूछताछ में कबूला कि यह प्रतिबंधित पदार्थ पंचकूला में आरोपी शमी कुमार से खरीदा था, जो टेलीग्राम मोबाइल एप के माध्यम से उनके संपर्क में आया था। जांच के मुताबिक आरोपी शमी की ओर से जारी किए गए क्यूआर कोड के माध्यम से आरोपी कुलदीप अपनी पत्नी के खाते से पैसे ट्रांसफर करता था। उसके बाद चंडीगढ़ क्षेत्र के जीरकपुर से प्रतिबंधित पदार्थ की डिलीवरी लेता था। उसने 24,000 रुपये नकद एकत्र किए और फिर 28,000 रुपये का भुगतान करके प्रतिबंधित सामान खरीदा। 

55 लाख रुपये के लेन-देन की बात सामने आई
यहां तक कि उस दिन कुलदीप ने अपनी पत्नी के खाते से 4,000 रुपये निकाले। हैरत की बात है कि आरोपी शमी के टेलीग्राम खाते में कुलदीप का मोबाइल नंबर नहीं था। 25 जनवरी को जांच टीम रिवर डेल अपार्टमेंट, जीरकपुर में शमी कुमार का पता लगाने में कामयाब रही। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर शिमला ले आई। जांच में उसके नाम पर दो बैंक खाते मिले हैं। करीब 55 लाख रुपये के लेन-देन की बात सामने आई है। 

आरोपी की जमानत याचिका खारिज
जिला अदालत ने एनडीपीएस के मामले में पंजाब के एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने जिला एसएएस नगर (मोहाली) के जीरकपुर निवासी आरोपी शमी कुमार को जमानत पर रिहा करने से इन्कार किया है। जांच टीम ने आरोपी को चिट्टे तस्करी में गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले दो महीने से न्यायिक हिरासत पर कैधू जेल में है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपी को जमानत पर रिहा करना न्याय के हित में नहीं होगा।

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