
शनिश्चरी अमावस्या 29 मार्च को है। इस दिन शनि कुंभ राशि से गोचर कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। ग्रह के राशि परिवर्तन से कुछ राशियों को शनिदेव की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू होगी जबकि कुछ राशि के जातकों को मुक्ति मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य प्रेम ने बताया कि राशि परिवर्तन से मेष, कुंभ, मीन, सिंह और धनु राशि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस दौरान शनि देव जैसे ही मीन राशि में प्रवेश करेंगे वैसे ही मकर राशि के ऊपर से शनि की साढ़ेसाती का असर हट जाएगा। शनि गोचर से मेष राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो जाएगी। शनि गोचर से कुंभ राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का तीसरा चरण, मीन राशि पर दूसरा चरण और मेष राशि वालों पर पहला चरण शुरू हो जाएगा। शनि के गोचर से सिंह और धनु राशि वालों पर शनि का ढैय्या शुरू होगी वहीं कर्क और वृश्चिक राशि के लोगों को ढैय्या से मुक्ति मिलेगी। अभी शनि कुंभ राशि में बैठ हैं। शनि को कुंभ राशि का स्वामी माना जाता हैं, क्योंकि इसका प्रतिनिधित्व शनि स्वयं करता है। 29 मार्च को शनि कुंभ राशि से मीन राशि में सुबह 11 बजे प्रवेश करेगा। इस दिन साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है। 29 मार्च को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा।
अनुशासन में रहकर करें कार्य : प्रेम पंडित
ज्योतिषाचार्य प्रेम पंडित ने बताया कि शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती में अनुशासन में रहकर कार्य करने चाहिए। किसी भी गलत कार्य से दूर रहना चाहिए। किसी भी कमजोर वर्ग को सताना नहीं चाहिए और किसी भी शॉर्टकट से कोई काम करने की जगह ईमानदारी से काम करना चाहिए। पैसों के मामले में आंख बंद करके किसी पर भी भरोसा न करें।
सिंह और धनु के लिए ढैय्या कष्टदायक : नौटियाल
पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि सभी ग्रह क्रियाशील होते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा लंबे समय तक एक राशि में शनि रहते हैं। इस बार ढैय्या सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए कष्टदायक रहेगी। मेष, सिंह और धनु राशि के लिए लोहा का पाया अशुभ फलदायक है। मिथुन, कन्या और मकर राशि वालों के लिए ताम्र का पाया शुभ होगा। वृष, तुला तथा मीन राशियों पर स्वर्ण का पाया मिश्रित फलदायक होगा। कर्क वृश्चिक तथा कुंभ राशि पर रजत का पाया शुभ फलदायक होगा।
उपाय:-
शनि के गोचर में प्रवेश से जिन राशियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। उनके लिए सबसे अच्छा दान करना माना गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार मेष, कुंभ, मीन, सिंह और धनु राशि के जातक गरीबों को जितना ज्यादा दान करेंगे। उतना उनके लिए अच्छा रहेगा। इस दौरान काले वस्त्र, चमड़े के जूते, काले रंग के छाते दान करें। वहीं वृद्ध लोगों, पशु पक्षियों सहित अन्य अक्षम जीवों की सहायता करें। भैंसों को चारा दें। शनि का तेल से अभिषेक करना, ढैया वालों को तुलादान और शनि बीज मंत्र का जाप करने से प्रभाव कम पड़ेगा।
शुभ प्रभाव :-
मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती खत्म होगी, जिससे इस राशि के जातकों को राहत मिलेगी। कर्क और वृश्चिक राशि से शनि की ढैय्या समाप्त होगी, जिससे इन जातकों को राहत मिलेगी। शनि का गोचर वृषभ राशि के जातकों के जीवन में खुशहाली ला सकता है और मिथुन राशि के जातकों को लाभप्रद साबित हो सकता है। शनि का गोचर तुला राशि के जातकों के लिए भी शुभ फलदायी हो सकता है।
अशुभ प्रभाव :-
मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू होगा। सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या शुरू होने से जातकों को कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। शनि गोचर का संयोग कुंभ राशि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। साथ ही साढ़ेसाती का प्रभाव भी इस राशि पर रहेगा। शनि गोचर का संयोग मीन राशि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। साढ़े साती में चोट, भय मानसिक तनाव बढ़ने का खतरा है।