हिमाचल में रिजर्व प्राइज से भी नीचे हो रहे ठेके नीलाम

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प्रदेश में इस बार शराब के ठेकों की नीलामी सरकार द्वारा तय किए गए आंकड़े से पार नहीं जा रहा है। जिस कारण ठेकों की नीलामी में देरी हो रही है।

प्रदेश में इस बार शराब के ठेकों की नीलामी सरकार द्वारा तय किए गए आंकड़े से पार नहीं जा रहा है। जिस कारण ठेकों की नीलामी में देरी हो रही है। कई जगह जहां ठेकों की नीलामी की गई है वहां भी रिजर्व प्राइज से नीचे ही नीलामी गई जिस कारण करोड़ों का घाटा आबकारी एवं कराधान विभाग को हो रहा है। शिमला जिला में भी पिछली बार के मुकाबले इस बार कम प्राइज पर ठेके नीलाम हुए हैं। शराब के ठेकों से नीलामी के दौरान होने वाले नुक्सान की आशंका को खत्म करने के लिए बुधवार को फिर से शराब की दुकानों की नीलामी की जानी प्रस्तावित है। इसके तहत शिमला, मंडी, कांगड़ा, ऊना, कुल्लू व बिलासपुर में शराब की दुकानों की नीलामी होगी।

इसमें कांगड़ा के शराब के ठेकों की नीलामी लायंस क्लब श्यामनगर में, शिमला के ठेकों की नीलामी बचत भवन शिमला, कुल्लू के शराब की दुकानों की नीलामी ढालपुर के सामुदायिक भवन में, मंडी में जिला परिषद भवन, बिलासपुर में उप आयुक्त के कार्यालय में, ऊना में उप आयुक्त के कार्यालय में नीलामी होनी है। सरकार ने न्यूनतम आरक्षित मूल्य पर नीलाम हुए सभी शराब के ठेकों की दोबारा से नीलामी के आदेश विभाग को दिए हैं। इसके साथ ही विभाग को अगले दस दिन तक इन शराब की दुकानों को पुराने ठेकेदार के माध्यम से ही चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके मुताबिक विभाग ने आगामी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

शिमला जिले में भी नहीं हुआ आंकड़ा पार
राज्य के 12 में से 6 जिलों में शराब के ठेकों की नीलामी पिछले साल के राजस्व से कम की हुई है। इसमें शिमला जिला सबसे ऊपर है। जिला में पिछले साल 254 करोड़ का राजस्व व शराब के ठेके की नीलामी से हुआ था। इस बार यह 203 करोड़ के आंकड़े को पार नहीं कर पा रहा है। वही कुल्लू में 21 करोड़, मंडी में 24 करोड़, बिलासपुर में 4 करोड़ और कांगड़ा में 20 करोड़ के राजस्व की कमी आई हैं। यह सभी ठेके अपने न्यूनतम आरक्षित मूल्य पर लेने की ठेकेदारों ने पेशकश की है। इसे सरकार ने नामंजूर कर दिया है। अब इन शराब के ठेकों की दोबारा से नीलामी बुधवार को की जानी प्रस्तावित है।

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