ट्रंप के रुख से हिमाचल के फार्मा उद्योग को राहत, बागवानों में शंका, जानिए पूरा मामला

US Tariff war: Trump's stance brings relief to pharma industry, but doubts among gardeners

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बुधवार को जारी किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा में फार्मास्युटिकल्स उद्योग को छूट दी गई है। आशंका जताई जा रही थी अमेरिका में आयात होने वाले सभी उत्पादों पर टैरिफ लगाए जाएगा जिससे हिमाचल के फार्मा उद्योग पर असर पड़ने की संभावना थी। लेकिन ट्रंप ने जब टैरिफ की घोषणा की तो भारत पर 27 फीसदी टैरिफ तो लगाया लेकिन फार्मा उद्योग को इससे पूरी तरह बाहर रखा गया।  हिमाचल प्रदेश देश का सबसे बड़ा फार्मा हब है। बद्दी, परवाणू और पांवटा साहिब में देश की सभी प्रतिष्ठित कंपनियां दवाओं का उत्पादन कर रही हैं। अमेरिका को दवाएं निर्यात करने वाली लिस्टेड कंपनियां भी सूबे में दवाएं तैयार कर रही हैं। 

अमेरिका के दबाव में वाशिंगटन सेब पर आयात शुल्क बढ़ाए केंद्र
 अमेरिकी दबाव में भारत सरकार सेब पर आयात शुल्क घटा सकती है। इससे हिमाचल प्रदेश के सेब बागवान चिंतित हो गए हैं। अमेरिका की टैरिफ घोषणा के बाद हिमाचल में किसान-बागवानों के सबसे बड़े संगठन संयुक्त किसान मंच ने मोदी सरकार से दृढ़ इच्छा शक्ति दिखाते हुए अमेरिकी सेब पर भारत में आयात शुल्क बढ़ाने की मांग की है। मंच के नेताओं ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि भारत अमेरिकी सेब पर आयात शुल्क घटाने को तैयार हो गया है। केंद्र सरकार ऐसा कोई फैसला लेकर किसान-बागवानों के हितों की आह़ुति न दें। अमेरिका ने भारत पर 27 फीसदी टैरिफ की घोषणा की है। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने की मांग है कि अमेरिका के टैरिफ के विरोध में भारत भी वाशिंगटन सेब पर प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाए।

2018 में अमेरिका ने स्टील और एल्युमीनियम पर 10 से 25 फीसदी शुल्क लगा दिया था, जिसके विरोध में भारत ने अमेरिकी सेब, अखरोट और बादाम सहित 30 उत्पादों प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाया था। अमेरिका के वाशिंगटन सेब पर शुल्क 50 से बढ़ा कर 75 फीसदी कर दिया गया था। इसका असर यह पड़ा कि देश में अमेरिकी सेब का आयात घट गया। साल 2018-19 में जहां अमेरिका से सालाना 1.27 लाख मीट्रिक टन सेब का आयात होता था। 2022-23 में यह घटकर 4,400 मीट्रिक टन रह गया। हालांकि 2023 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के भारत आने के बाद टैरिफ 75 से घटा कर 50 फीसदी कर दिया गया। इसका नुकसान यह हुआ कि 2024 में अमेरिकी सेब का आयात 1.75 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके कारण हिमाचली सेब उत्पादकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार को देश के किसान-बागवानों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।

हिमाचल के सांसद भी केंद्र सरकार से उठाएं मांग
संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने हिमाचल प्रदेश के सात सांसदों से भी प्रधानमंत्री के समक्ष हिमाचल के सेब बागवानों के हितों की पैरवी करने की मांग उठाई है।

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