
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत अनुबंध चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन अफसरों के पक्ष में यथास्थिति का आदेश नहीं है, उनका बढ़ा वेतन नहीं रोका जा सकता। वेकेशन जज राकेश कैथला की अदालत ने कहा कि अनुबंध आधार पर कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों को 24 जुलाई 2025 के पत्र के अनुसार संशोधित और बढ़ा पारिश्रमिक वेतन प्रदान किया जाए। अदालत ने केंद्र सरकार को मामले में तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। रक्षा मंत्रालय ने 24 नवंबर 2025 को एक पत्र जारी कर पॉलीक्लीनिक में अनुबंध पर कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों, विशेषज्ञों और प्रभारी अधिकारियों के वेतन में संशोधन किया था।
13 नवंबर को सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन की ओर से एक पत्र जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि जिन कर्मचारियों के मामले अदालत में लंबित हैं या जिनके पक्ष में यथास्थिति का आदेश है, उन्हें संशोधित वेतन का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसी पत्र के आधार पर विभाग ने याचिकाकर्ताओं का बड़ा वेतन बंद कर दिया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उन्हें जुलाई से अक्तूबर 2025 तक बढ़ा वेतन दिया गया, लेकिन नवंबर से इसे अचानक रोक दिया गया। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ताओं के मामले में नियुक्ति की शर्तों को लेकर कोर्ट की ओर से ऐसा कोई स्टे या यथास्थिति का आदेश नहीं दिया गया था, जो उन्हें लाभ से वंचित करे। कोर्ट ने कहा कि यह समझना कठिन है कि किस आधार पर याचिकाकर्ताओं का संशोधित वेतन रोका, जबकि उनकी नियुक्ति के संबंध में कोई रोक प्रभावी नहीं थी। अदालत ने यह आदेश डॉ. हिमांशु जोशी और अन्य बनाम भारत संघ में दिया है
