भू-रिकॉर्ड आधुनिकीकरण के लिए 242 करोड़ का ऋण, केंद्र ने रखीं सख्त शर्तें

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केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण के लिए 242.77 करोड़ रुपये का सशर्त ऋण जारी किया है। पूंजीगत कार्यों के लिए विशेष सहायता ऋण के रूप में यह बजट कड़ी चेतावनी के साथ जारी किया गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से भेजे गए मंजूरी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि इस योजना के तहत जारी दिशा-निर्देशों और अनिवार्य शर्तों का उल्लंघन किया गया तो राज्य को मिलने वाले टैक्स की हिस्सेदारी से इसकी कटौती की जाएगी। यह पत्र वित्त मंत्रालय के सहायक निदेशक सार्थक उपाध्याय की ओर से जारी किया गया है। पत्र को हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव वित्त को भेजा गया है।

चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हिमाचल प्रदेश यह विशेष सहायता ऋण की 242.77 करोड़ की राशि जारी की गई है। पत्र में साफ किया गया है कि यह राशि भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण और उनके डिजिटल से जुड़े पूंजीगत कार्यों के लिए विशेष सहायता ऋण के रूप में दी गई है। यह केंद्र की ओर से दिया जाने वाला ऋण है, जिसे निर्धारित शर्तों के अनुसार उपयोग करना अनिवार्य होगा। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि इस राशि का उपयोग केवल भूमि रिकॉर्ड से जुड़े स्थायी कार्यों जैसे राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण, नक्शों को अपडेट करने, रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली का सुदृढ़ीकरण और संबंधित अधोसंरचना के विकास पर ही किया जा सकता है।

इस धनराशि को किसी अन्य दैनिक प्रशासनिक खर्च पर उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। सभी दिशा-निर्देश प्रदेश सरकार और उसकी सभी क्रियान्वयन एजेंसियों पर पूरी तरह लागू होंगे। इन शर्तों का पूरी तरह से पालन अनिवार्य होगा। केंद्र सरकार ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि अनिवार्य शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर राज्य को मिलने वाली करों की हिस्सेदारी से सीधे राशि की कटौती की जाएगी। यह कटौती बिना किसी अतिरिक्त सूचना के होगी।

पिछले दिनों केंद्र की ओर से हिमाचल को पूंजीगत निवेश के लिए 545 करोड़ का विशेष सहायता ऋण जारी किया है। इसमें भी शर्तों के उल्लंघन पर कर के हिस्से से कटौती की चेतावनी दी गई है। आदेश के अनुसार, यह धनराशि भी हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तावित और केंद्र की ओर से स्वीकृत पूंजीगत परियोजनाओं के लिए उपयोग की जा सकेगी।

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