
हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस मंगलवार देर शाम को अपने प्रत्याशी के नाम का एलान कर सकती है। पार्टी के भीतर इस बार हिमाचल के किसी नेता को मौका देने की मांग जोर पकड़ती दिख रही है। अधिकांश कैबिनेट मंत्री और विधायक राज्य के हितों की पैरवी करने वाले स्थानीय नेता के पक्ष में बताए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिल्ली में पार्टी हाईकमान से चर्चा की। उन्होंने प्रत्याशी चयन का अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया है। सूत्रों के अनुसार उन्होंने प्रदेश के नेताओं की राय से भी आलाकमान को अवगत कराया है।
कांग्रेस आलाकमान केंद्रीय नेताओं के नाम पर भी विचार कर रहा है। प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के नाम को लेकर अटकलें तेज हैं। हालांकि प्रदेश के कई नेता बाहरी उम्मीदवार को टिकट देने के पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं। प्रदेश से वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। उन्हें अनुभवी और राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी चेहरा माना जा रहा है।
Indian National Congress की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह की दावेदारी को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। संगठन के भीतर उनके नाम पर चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसी कारण राजनीतिक गलियारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस विधायक इस बार हिमाचल से जुड़े किसी नेता को राज्यसभा भेजने के पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि प्रदेश से संबंधित मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए स्थानीय प्रतिनिधित्व आवश्यक है। इसी वजह से पार्टी के भीतर ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ उम्मीदवार को लेकर मंथन जारी है।
राज्यसभा चुनाव के लिए 5 मार्च को नामांकन दाखिल किए जाएंगे, जबकि 16 मार्च को मतदान होना है। मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस के 40 विधायक हैं, जबकि Bharatiya Janata Party के पास 28 विधायक हैं। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
करीब दो वर्ष पहले हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा था, जब उसके प्रत्याशी Abhishek Manu Singhvi क्रॉस वोटिंग के कारण पराजित हो गए थे। इसके बाद भाजपा उम्मीदवार Harsh Mahajan राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे।
उस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में गंभीर संकट की स्थिति पैदा हो गई थी। इस बार कांग्रेस किसी भी तरह की चूक से बचना चाहती है और उम्मीदवार चयन में विशेष सतर्कता बरत रही है। प्रत्याशी के नाम की घोषणा के साथ ही प्रदेश की सियासत में हलचल और तेज होने के आसार हैं।
