
हिमाचल प्रदेश में संस्थागत डिलिवरी बढ़ने से पांच वर्षों में मातृ मृत्यु (मेटरनल डेथ) की दर घट गई है। ये दर 2025-26 वर्ष में मातृ मृत्यु 20 पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार मातृ मृत्यु को कम करने का बड़ा कारण संस्थागत डिलिवरी और समय पर जांचें है। इससे पहले घर पर ही डिलिवरी होती थी। साथ ही जांच करवाने में भी कई बार देरी हो जाती थी। ऐसे में हेल्थ प्रोफेशनल डिलिवरी न करवाने से कई बाद दिक्कत आ जाती थी। अब प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का फायदा मिला है।
इसमें उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल की गई बल्कि इन्हें अस्पतालों में निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं भी प्रदान की गई है। इससे अभियान का प्रदेश में 10 साल से असर देखने को मिला है। अब आगामी दिनों में स्वास्थ्य विभाग ने इसे शून्य करने के लिए योजना तैयार कर दी है। इस योजना में न केवल आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जाएगा बल्कि पंचायती राज संस्थाओं, नेताओं, स्वयं सहायता समूहों को भी जिम्मेदारी दी है।
हर माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाएं करवा सकती है जांच
स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं के लिए हर माह की नौ तारीख को विशेष जांच की सुविधा शुरू की है। इस सुविधा में दूसरी और तीसरी तिमाही में गर्भवती महिलाएं जांच कर सकती है। इससे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की शीघ्र पहचान और प्रबंधन में सहायता मिली सकती है।प्रदेश में 91.7 फीसदी संस्थानों में हुई डिलिवरी
प्रदेश में अस्पतालों में डिलिवरी होने की संख्या बढ़ गई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2023-24 में भी चार वर्षों में उछाल आया है। 2019-21 के सर्वे के अनुसार 88.2 फीसदी संस्थागत डिलिवरी होती थी। 2023-24 के सर्वे में बढ़कर 91.7 फीसदी हो गई है। इसी तरह से अस्पतालों में स्किल हेल्थ प्रोफेशनल की ओर से डिलिवरी होने की मद में भी इजाफा हुआ है। 2019-21 के बीच 87.1 फीसदी थी जबकि इस बार बढ़कर 92.4 फीसदी हो गई है। इससे विभाग भी अस्पतालों में सुरक्षित डिलिवरी का दावा कर रहा है।
ये है पांच साल का मातृ मृत्यु का आंकड़ा
| वर्ष | मातृ मृत्यु |
|---|---|
| 2021-22 | 72 |
| 2022-23 | 46 |
| 2023-24 | 42 |
| 2024-25 | 42 |
| 2025-26 | 20 |
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में 10 साल पूर्ण हो गए है। इस अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया गया। इसका असर प्रदेश में देखने को मिला है। प्रदेश में 2025-26 में मातृ मृत्यु 20 रह गई है। इसे भी शून्य करने के लिए योजना बनाई गई है। –डॉ. राजेश गुलेरी, डिप्टी मिशन डायरेक्टर, एनएचएम
