
हिमाचल प्रदेश के लाहाैल-स्पीति जिले के जाहलमा नाले में आई बाढ़ ने एक शादी की रस्मों में बाधा डाल दी। कुल्लू की लगघाटी से लाहौल लौट रही बरात को उफनते नाले के कारण एक दिन दुल्हन के घर ही रुकना पड़ा। सोमवार को दूल्हा-दुल्हन और बरातियों ने लोहे के गार्डर के सहारे नाला पार कर अपने गंतव्य तक पहुंचने का सफर पूरा किया। जिले के हिंसा गांव निवासी सुदर्शन राघव सोमवार तड़के बरात लेकर कुल्लू की लगघाटी गए थे।
बाढ़ आने से बरातियों को दुल्हन के घर ही रात बितानी पड़ी
शाम तक दुल्हन रीता के साथ घर लौटने की योजना थी, लेकिन दोपहर बाद जाहलमा नाले में बाढ़ आने से बरातियों को दुल्हन के घर ही रात बितानी पड़ी। मंगलवार सुबह लौटते समय बरात जाहलमा नाले पहुंची तो सभी ने वाहन एक ओर छोड़ दिए। स्थानीय लोगों और बीआरओ की ओर से लगाए गए लोहे के गार्डर के सहारे दूल्हा-दुल्हन व बरातियों ने नाला पार किया। दूसरी ओर खड़ी गाड़ियों से वे हिंसा गांव के लिए रवाना हुए। दूल्हे के रिश्तेदार सुरेंद्र ने बताया कि घर पहुंचने के बाद शादी की शेष रस्में मंगलवार को पूरी कराई गईं।जाहलमा नाले पर गार्डर लगा कर निकाले लोग और सब्जियां
जाहलमा नाले में बार-बार जलस्तर बढ़ रहा है। ऐसे में दो दिनों से वैकल्पिक मार्ग पर वाहनों की आवाजाही थम गई है। उदयपुर उपमंडल की 14 पंचायतों के साथ पांगी घाटी के लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। सोमवार को पांच-छह बार नाला उफान पर आया, लेकिन मंगलवार को पानी का बहाव कम होने पर बीआरओ के जवानों ने लोहे के गार्डर डालकर लोगों को नाला आरपार करवाया। साथ ही व्यापारियों ने घाटी में खरीदी मटर की फसल को मजदूरों की मदद से पीठ में ढोकर निकाली।
