बादल फटने के बाद गारगे नाले में आई बाढ़ ने आईटीबीपी कैंप में मचाई तबाही

Spread the love

किन्नौर की सांगला वैली में बादल फटने के बाद गारगे नाले में आई बाढ़ से आईटीबीपी कैंप समेत कई क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है। मलबा और बोल्डर कैंप परिसर में घुसने से स्टोर, कार्यालय, बैरक और अन्य सुविधाएं प्रभावित हुईं। प्रशासन ने करीब 5 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया है। वहीं, रकछम पंचायत के ग्रामीणों ने जवानों और पर्यटकों की मदद कर मानवता की मिसाल पेश की।किन्नौर की सांगला वैली में शुक्रवार शाम को बादल फटने के बाद मस्तरंग के पास गारगे नाले में आई बाढ़ ने आईटीबीपी कैंप में भारी तबाही मचाई। आईटीबीपी कैंप में करीब दो हेक्टेयर हिस्से में बाढ़ के साथ मलबा और बड़े-बड़े पत्थर (बोल्डर) आए, जो स्टोर, कार्यालय, ईंधन स्टोर, एटीएम, ऑफिसर मैस और आवासीय बैरक में घुस गए।

आईटीबीपी की बस, एक स्कॉर्पियो गाड़ी और एक जवान की कार को भी आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा हेलीपैड, सिग्नल केंद्र और कैंप की करीब 200 मीटर सड़क को भी नुकसान पहुंचा है।रविवार को कैंप में चारों ओर बोल्डर और मलबा दिखाई दिया। इस बाढ़ से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और निजी भूमि पर नकदी फसल को भी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ से बीआरओ के अधीन छितकुल-सांगला सड़क का करीब 60 मीटर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। हालांकि, बीआरओ ने रविवार को 20 घंटे की मशक्कत के बाद सड़क को बहाल कर दिया।  वहीं, छितकुल में फंसे पर्यटकों को भी नाले के ऊपर पेड़ के सहारे निकाला गया। बाढ़ से रकछम गांव के आत्माराम, इंद्र भगत और राजभगत की नकदी फसल को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ से आइटीबीपी परिसर में खाने और अन्य व्यवस्थाएं भी प्रभावित हुईं।

उधर, स्थानीय प्रशासन ने रविवार को नुकसान का आकलन किया। प्रशासन की ओर से 5 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। यह नुकसान आईटीबीपी, बीआरओ और निजी संपत्ति को हुआ है।वहीं, तहसीलदार सांगला हरदयाल सिंह, रकछम पंचायत प्रधान सुनीला नेगी, उप प्रधान शमशेर नेगी, छितकुल पंचायत प्रधान रवीना ठाकुर, उप प्रधान सुधीर नेगी, बीडीसी सदस्य कृष्णा नेगी, महिला मंडल रकछम की प्रधान शंकर देवी और  छितकुल महिला मंडल की प्रधान सूरज कुमार नेगी ने आपदा ग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण किया और हर कार्य में सहयोग करने का आश्वासन दिया।

आपदा में एक-दूसरे को दिया आश्रय
आपदा के तुरंत बाद स्थानीय लोग एकजुट होकर बचाव कार्यों में जुट गए। उन्होंने फंसी हुई गाड़ियों और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। रकछम पंचायत के लोगों ने एक-दूसरे को आश्रय दिया और अपनी सुविधाओं को जरूरतमंदों के साथ साझा किया। रकछम की महिलाओं ने इस विकट परिस्थिति में अपने-अपने घरों में खाना बनाकर आईटीबीपी के जवानों, पर्यटकों और अन्य जरूरतमंदों को भोजन करवाया। साथ ही अपने घरों के दरवाजे जरूरतमंदों के लिए खोल दिए और उनके रहने व खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया।

रविवार रात के खाने का इंतजाम छितकुल महिला मंडल ने किया। रकछम पंचायत की प्रधान सुनीला नेगी ने कहा कि जब हम सभी संगठित हों और निस्वार्थ सेवा भाव मन में हो, तो किसी भी विकट परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस आपदा की घड़ी में पंचायत के सभी सदस्यों ने कंधे से कंधा मिलाकर हर मोर्चे पर काम किया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और बचाव टीमों के साथ मिलकर सड़कों से हटाया मलबा 
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और बचाव टीमों जैसे आईटीबीपी के साथ मिलकर सड़कों से मलबा और पत्थर हटाने के काम में योगदान दिया। रकछम पंचायत की महिलाओं और ग्रामवासियों ने निस्वार्थ सेवा भाव से काम किया। उन्होंने साबित किया कि स्थानीय समाज ही आपदा के समय सबसे पहला रक्षक होता है। उनकी एकजुटता और सेवाभाव की पूरे क्षेत्र और प्रशासन ने भी सराहना की। तहसीलदार सांगला हरदयाल सिंह ने कहा कि प्रशासन की ओर से राहत बचाव कार्य जारी है। बंद हुए छितकुल मार्ग को बहाल कर दिया है। इस आपदा से करीब 5 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *