गैर सरकारी संगठन भी आएंगे आरटीआई एक्ट के दायरे में, उपायुक्तों को भेजे पत्र

हिमाचल प्रदेश में गैर सरकारी संगठन भी अब आरटीआई के दायरे में आएंगे। यह व्यवस्था सरकार की ओर से पर्याप्त रूप से वित्त पोषित संगठनों या संस्थाओं पर लागू होगी। ऐसे तमाम गैर सरकारी प्रतिष्ठान पब्लिक अथाॅरिटी माने जाएंगे। इसे स्पष्ट करते हुए सचिव प्रशासनिक सुधार राखिल काहलों ने सभी सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों, निगमों-बोर्डों के प्रबंध निदेशकों और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुखों को पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है।

इस पत्र के अनुसार भारत के उच्चतम न्यायालय ने अपनी सिविल अपील नंबर 2013 की 9828 में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 2 (एच) को परिभाषित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित गैर सरकारी संगठन पब्लिक अथाॅरिटी की सीमा में आते हैं। इन सभी प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे इसे सभी जनसूचना अधिकारियों के ध्यान में लाएं।

ऐसे संगठनों को रखने होंगे अपने जनसूचना अधिकारी
हिमाचल में ऐसे तमाम गैर सरकारी संगठनों को अपने जनसूचना अधिकारी रखने होंगे। वे आरटीआई एक्ट के तहत मांगी जानकारी को समयबद्ध तरीके से जारी करेंगे। अगर वे समय पर सूचना नहीं देते हैं तो संबंधित प्रशासनिक विभाग की ओर से नामित प्रथम अपीलीय अथाॅरिटी के पास अपील की जा सकेगी। पहली अपील से भी संतोष न हो तो वे दूसरी अपीलीय अथाॅरिटी यानी राज्य सूचना आयोग के पास अपील या शिकायत कर सकेंगे।

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