
हिमाचल हाईकोर्ट ने आईपीएस इल्मा अफरोज को फिर से बद्दी में एसपी तैनात करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी की नियुक्ति और तबादला कहां व कैसे करना है, यह सरकार के क्षेत्राधिकार में आता है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने कहा कि अदालत जनहित याचिका के माध्यम से ऐसे मामलों में दखल नहीं कर सकती है। याचिकाकर्ता ऐसी कोई मांग नहीं कर सकता है कि कहां पर अधिकारी की नियुक्ति होगी और कहां पर तैनाती होगी। विशेषकर सेवा मामलों में जनहित याचिका दायर नहीं की जा सकती।
अदालत ने आईपीएस अधिकारी अफरोज के 9 सितंबर 2024 के तबादले आदेश पर लगाई रोक को हटा दिया है। कोर्ट ने एक अन्य आपराधिक मामले में अफरोज काे जांच का जिम्मा सौंपा था। अब उस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दायर होनी बाकी है। इस वजह से अदालत ने आदेश दिए थे कि सरकार कोर्ट की अनुमति के बिना अधिकारी का तबादला नहीं कर सकती। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
इसमें अफरोज को फिर से बद्दी में एसपी तैनात करने की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि अफरोज की तैनाती से बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ की आम जनता अपने आप को सुरक्षित महसूस करेगी। जबसे उन्हें एसपी बद्दी तैनात किया गया था उन्होंने क्षेत्र में खनन माफिया और नशीली दवाओं के खिलाफ माफिया पर कार्रवाई की। अब फिर से वहां पर माफिया राज कायम हो गया है। कुछ लोगों की ओर से मुख्यमंत्री से भी अफरोज को फिर से बद्दी में एसपी लगाने की मांग की थी