संगठित अपराध विधेयक विधानसभा में पारित, जान लेने वाले चिट्टा तस्करों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान

himachal organized crime bill passed in Assembly, provision of death penalty for chitta smugglers who kill

चिट्टा तस्करी, नकली शराब बेचने और अन्य प्रकार के किसी संगठित अपराध से अगर किसी की मौत होती है तो दोषियों के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास तक का प्रावधान होगा। उसे 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी देना होगा। नशे से कमाई की संपत्ति जब्त की जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने की ओर से विधानसभा के सदन पटल पर रखा गया हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध विधेयक शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित किया गया। अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून का रूप लेगा। 

संगठित अपराध विधेयक में कई प्रावधान
विधेयक के अनुसार, जो कोई संगठित अपराध के लिए उकसाता है, प्रयास करता है, षड्यंत्र रचता है, जानबूझकर उसे अंजाम देने में मदद करता है या संगठित अपराध की तैयारी के लिए किसी अन्य कार्य में संलग्न होता है, उसे कम से कम एक साल के कारावास से दंडित किया जाएगा। सजा आजीवन कारावास तक बढ़ाई जा सकती है। वहीं, पांच लाख तक के जुर्माने का भी प्रावधान रहेगा। कोई भी व्यक्ति जो संगठित अपराध गिरोह का सदस्य है, उसे कम से कम एक साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। जो कोई जानबूझकर किसी ऐसे व्यक्ति को शरण देगा या छिपाएगा, जिसने संगठित अपराध का अपराध किया है, उसे कम से कम छह महीने के कारावास से दंडित किया जाएगा मगर सजा को आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकेगा। उसे बीस हजार रुपये से लेकर पांच लाख तक जुर्माना लगेगा। मगर यह उपधारा ऐसे किसी मामले में लागू नहीं होगी, जिसमें अपराधी के पति या पत्नी की ओर से शरण दी गई हो या छिपाया गया हो।

जो कोई संगठित अपराध के कमीशन से प्राप्त किसी संपत्ति पर कब्जा करता है, उसे एक वर्ष से कम अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा और इसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। उसे दो लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। यदि किसी संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य की ओर से कोई व्यक्ति चल या अचल संपत्ति पर कब्जा करता है, जिसका वह संतोषजनक हिसाब नहीं दे सकता है, तो उसे एक वर्ष से कम अवधि के कारावास से दंडित किया जाएगा, लेकिन इसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए दोषी पाया गया है, उसे दूसरी और प्रत्येक बाद की सजा के लिए कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि सजा की अधिकतम अवधि के डेढ़ गुना तक हो सकती है। वह जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा जो जुर्माने की अधिकतम राशि के डेढ़ गुना तक हो सकता है।

ड्रग्स मिली तो भी दो से 14 साल तक की सजा का प्रावधान
जिस व्यक्ति के पास ड्रग्स मिलेगी या खरीदेगा और इसका परिवहन करेगा उसे दो वर्ष से कम नहीं और चौदह वर्ष तक के कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा। उससे कम से बीस हजार और अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी देगा।

नशे के अलावा इस तरह का अपराध कहलाएगा संगठित
अवैध खनन, वन कटान, वन्य जीवों की तस्करी, खतरनाक पदार्थों की डंपिंग, मानव अंगों की तस्करी, स्वास्थ्य विभाग में फर्जी बिल बनाने, झूठे क्लेम करने, साइबर आतंकवाद, फिरौती, फर्जी दस्तावेज रैकेट, खाने की वस्तुओं में मिलावट और मैच फिक्सिंग के मामले संगठित अपराध कहलाएंगे। संगठित अपराध में सरकारी कर्मचारी शामिल पाए गए तो सजा दोगुनी होगी। नकली शराब व नशीले पदार्थ बनाने वालों  पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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