एम्स बिलासपुर के 22 प्रशिक्षुओं को डाक्टर बनने के लिए करना होगा एक साल का इंतजार

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एम्स बिलासपुर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे 22 प्रशिक्षुओं को डाक्टर बनने के लिए एक साल और इंतजार करना पड़ेगा। नियमों को पूरा न करने वाले एमबीबीएस के 50 में से 22 प्रशिक्षुओं को संस्थान ने वार्षिक परीक्षा में बैठने के लिए अपात्र घोषित कर दिया है।

 एम्स बिलासपुर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे 22 प्रशिक्षुओं को डाक्टर बनने के लिए एक साल और इंतजार करना पड़ेगा। नियमों को पूरा न करने वाले एमबीबीएस के 50 में से 22 प्रशिक्षुओं को संस्थान ने वार्षिक परीक्षा में बैठने के लिए अपात्र घोषित कर दिया है। री-अपीयर घोषित इन 22 प्रशिक्षुओं को एक साल अतिरिक्त लगाना पड़ेगा। इसमें सबसे ज्यादा छात्र पीडियाट्रिक्स विभाग में डिटेन एवं री-अपीयर हुए हैं। एम्स बिलासपुर में पहले बैच के प्रशिक्षुओं की इन दिनों वार्षिक परीक्षाएं चल रहीं हैं। परीक्षाओं से पूर्व संस्थान ने ऐसे परीक्षार्थियों की सूची जारी की है, जो परीक्षा के लिए पात्र नहीं हैं।

अपात्र वह परीक्षार्थी घोषित किए गए हैं, जिन्होंने पूरे वर्ष नैशनल मैडीकल काऊंसिल के आदेशों के अनुसार निर्धारित नियमों को पूरा नहीं किया। इन सभी अपात्र प्रशिक्षुओं की 75 प्रतिशत हाजिरी नहीं है। इसके अलावा, उन लोगों की इंटरनल असैसमैंट में 50 प्रतिशत अंक नहीं हैं। नीट जैसी कठिन परीक्षा पास करके एमबीबीएस. सीट हासिल करने के बाद यह सभी प्रशिक्षु लापरवाह हो गए हैं। इन युवाओं की लापरवाही संस्थान की छवि पर भारी पड़ रही है। इसका कारण यह है कि यह एम्स बिलासपुर का पहला बैच है।

रजिस्ट्रार एम्स बिलासपुर राकेश कुमार का कहना है कि  डाक्टरी जैसी संवेदनशील पढ़ाई के दौरान किसी भी प्रशिक्षु को राहत नहीं दी जा सकती। उनकी एक छोटी सी लापरवाही भविष्य में मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है। नियमों को पूरा न करने वाले प्रशिक्षुओं को ही री-अपीयर घोषित किया गया है।

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