
हिमाचल प्रदेश में वक्फ बोर्ड की 5343 अचल संपत्तियां हैं। इनमें से 6 हस्तांतरित की गई हैं तो कई विवादित हैं। विवादित संपत्तियों में अचल संपत्ति ही हैं और ऐसी संपत्तियों की संख्या करीब 20 फीसदी है। किन्नौर को छोड़कर सभी जिलों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां और जमीनें हैं। इनकी ज्यादातर जमीनों पर कब्रिस्तान बने हुए हैं। कब्रिस्तान के आसपास की जमीन पर वक्फ बोर्ड का कब्जा है। जमीन संबंधित मामले न्यायालय में भी चल रहे हैं। जिला शिमला, सिरमौर, कांगड़ा में वक्फ बोर्ड की ज्यादा संपत्तियां हैं। हिमाचल प्रदेश में वक्फ बोर्ड की अधिकांश संपत्तियां कई प्रमुखों स्थानों में हैं।
हिमाचल में नहीं है वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष व सदस्य
हिमाचल प्रदेश में वक्फ बोर्ड का गठन करीब दो साल से नहीं किया गया है। यहां पर तो अध्यक्ष बनाया गया है और न ही इसके सदस्य ही हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को सत्ता में आए हुए ढाई साल का समय हो गया है, लेकिन बोर्ड अध्यक्ष और सदस्यों की तैनाती नहीं की गई है।
राजधानी में वक्फ बोर्ड का 70 बीघा जमीन पर मालिकाना हक
हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड कथित तौर पर वन और राजस्व विभाग के बाद तीसरा सबसे बड़ा भूमिधारक है। राजधानी में करीब 70 बीघा भूमि पर वक्फ बोर्ड का मालिकाना हक है। इसमें शिमला शहरी क्षेत्र के संजौली, छोटा शिमला, लक्कड़ बाजार, बैम्लोई, ताराहाल, बालूगंज और लोअर बाजार सर्किल शामिल हैं, जहां पर वक्फ बोर्ड की संपत्तियां हैं।
सबसे ज्यादा संपत्ति 46 बीघा भूमि टुटीकंडी वार्ड के पांजड़ी क्षेत्र में है। इसके अलावा लक्कड़ बाजार में 7.41 और ताराहाल में 6.13 बीघा भूमि पर बोर्ड का मालिकाना हक है। प्रशासन के मुताबिक शिमला शहरी के सात सर्किल में करीब 11 मुहाल पर वक्फ बोर्ड की संपत्तियां हैं। बैम्लाेई में 3.16 बीघा सहित छोटा शिमला, बालूगंज, लोअर बाजार में करीब 10 बीघा जमीन पर वक्फ की संपत्तियां पंजीकृत हैं। संजौली में करीब 17.98 विस्वा जमीन वक्फ बोर्ड की है। अधिकतर संपत्ति हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड की हैं। इसके साथ में सुन्नी वक्फ बोर्ड और पंजाब वक्फ बोर्ड की भी संपत्तियां पंजीकृत हैं। चल-अचल संपत्तियों पर गौर करे तो कब्जाधारकों ने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में मकान, मस्जिद और दुकानों का निर्माण किया है।