
हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनुकंपा आधार पर सरकारी नौकरी के लिए पहले आर्थिक आधार पर खारिज किए गए मामलों को एक बार फिर मौका देने का फैसला किया है। वित्त विभाग ने एक जुलाई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेंडम) में स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल एकमुश्त (वन टाइम मेजर) के रूप में दी जा रही है और सिर्फ उन्हीं मामलों पर लागू होगी, जो पहले परिवार को आर्थिक रूप से पात्र नहीं मानने के कारण अस्वीकृत किए गए थे।
सरकार के निर्देशों के अनुसार संबंधित विभाग वर्तमान में लागू अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत पात्र आश्रितों की आर्थिक स्थिति का नए सिरे से आकलन करेंगे। इसके लिए पात्र आश्रितों को 31 दिसंबर 2026 तक संबंधित विभागाध्यक्ष के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद विभाग को एक महीने के भीतर मामले का निर्णय करना होगा।
कार्यालय ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि इस विशेष व्यवस्था के तहत केवल उन्हीं मामलों की दोबारा समीक्षा होगी, जिन्हें पहले केवल ‘Want of Indigency’ यानी आर्थिक तंगी के मानदंड पूरे नहीं होने के आधार पर खारिज किया गया था। किसी अन्य कारण से अस्वीकृत मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा। सरकार ने यह भी कहा है कि यदि कोई मामला सभी नियमों और पात्रता शर्तों पर खरा उतरता है, तो नियुक्ति पत्र जारी करने से पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।वित्त विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति किसी का अधिकार नहीं है।
नियुक्ति से पहले संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि मृत सरकारी कर्मचारी का परिवार वर्तमान नीति के अनुसार वास्तव में आर्थिक तंगी (Indigent Circumstances) में है। यह विशेष छूट सीधी भर्ती के पांच प्रतिशत कोटे में आवश्यक शिथिलता के साथ लागू की जाएगी। इस संबंध में वित्त विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, आयोगों, बोर्डों, निगमों और अन्य संबंधित संस्थानों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं।
